Saturday, 17 March 2018

2 रुपये कमाने वाली कल्पना सरोज ने खड़ी की 500 करोड़ की कम्पनी


हेलो दोस्तों 
          कहानी थोड़ी फ़िल्मी है लेकिन है सौ फीसदी सच्ची। कल्पना सरोज जी का जीवन ‘‘स्लमडॉग मिलेनियर’’ फिल्म को यथार्थ करता हुआ नजर आता है। Kalpana Saroj की कहानी उस दलित पिछड़े समाज के लड़की की कहानी है जिसे जन्म से ही अनेकों कठिनाइयों से जूझना पड़ा, समाज की उपेक्षा सहनी पड़ी, बाल-विवाह का आघात झेलना पड़ा, ससुराल वालों का अत्याचार सहना पड़ा, दो रुपये रोज की नौकरी करनी पड़ी और उन्होंने एक समय खुद को ख़त्म करने के लिए ज़हर तक पी लिया, लेकिन आज वही कल्पना सरोज 500 करोड़ के बिजनेस की मालकिन है। आइये जानते हैं कल्पना सरोज के बेहद inspiring life journey के बारे में।

पारिवारिक पृष्ठभूमि:

सन 1961 में महाराष्ट्र के अकोला जिले के छोटे से गाँव रोपरखेड़ा के गरीब दलित परिवार में कल्पना का जन्म हुआ। कल्पना के पिता एक पुलिस हवलदार थे और उनका वेतन मात्र 300 रूपये था जिसमे कल्पना के 2 भाई – 3 बहन , दादा-दादी, तथा चाचा जी के पूरे परिवार का खर्च चलता था। पुलिस हवलदार होने के नाते उनका पूरा परिवार पुलिस क्वार्टर में रहता था।कल्पना जी पास के ही सरकारी स्कूल में पढने जाती थीं, वे पढाई में होशियार थीं पर दलित होने के कारण यहाँ भी उन्हें शिक्षकों और सहपाठियों की उपेक्षा झेलनी पड़ती थी।

कल्पना जी अपने बचपन के बारे में बताते हुए कहती हैं –

हमारे गाँव में बिजली नहीं थी…कोई सुख-सुविधाएं नहीं थीं…बचपन में स्कूल से लौटते वक़्त मैं अकसर गोबर उठाना, खेत में काम करना और लकड़ियाँ चुनने का काम करती थी…

कम उम्र में विवाह:

कल्पना जी जिस society से हैं वहां लड़कियों को “ज़हर की पुड़िया” की संज्ञा दी जाती थी, इसीलिए लड़कियों की शादी जल्दी करके अपना बोझ कम करने का चलन था। जब कल्पना जी 12 साल की हुईं और सातवीं कक्षा में पढ़ रही थीं तभी समाज के दबाव में आकर उनके पिता ने उनकी पढाई छुडवा दी और उम्र में बड़े एक लड़के से शादी करवा दी। शादी के बाद वो मुंबई चली गयीं जहाँ यातनाए पहले से उनका इंतजार कर रहीं थीं।

कल्पना जी ने एक इंटरव्यू में बताया-

मेरे ससुराल वाले मुझे खाना नहीं देते, बाल पकड़कर बेरहमी से मारते, जानवरों से भी बुरा बर्ताव करते। कभी खाने में नमक को लेकर मार पड़ती तो कभी कपड़े साफ़ ना धुलने पर धुनाई हो जाती।

ये सब सहते-सहते कल्पना जी जी स्थिति इतनी बुरी हो चुकी थी कि जब 6 महीने बाद उनके पिता उनसे मिलने आये तो उनकी दशा देखकर उन्हें गाँव वापस लेकर चले गये।

आत्महत्या का प्रयास:

जब शादी-शुदा लड़की मायके आ जाती है तो समाज उसे अलग ही नज़र से देखता है। आस-पड़ोस के लोग ताने कसते, तरह-तरह की बातें बनाते। पिताजी ने दुबारा पढ़ाने की भी कोशिश की पर इतना दुःख देख चुकी लड़की का पढाई में कहाँ मन लगता! हर तरफ से मायूस कल्पना को लगा की जीना मुश्किल है और मरना आसान है ! उन्होंने कहीं से खटमल मारने वाले ज़हर की तीन बोतलें खरीदीं और चुपके से उसे लेकर अपनी बुआ के यहाँ चली गयीं।
बुआ जब चाय बना रही थीं तभी कल्पना ने तीनो बोतलें एक साथ पी लीं… बुआ चाय लेकर कमरे में घुसीं तो उनके हाथ से कप छूटकर जमीन पर गिर गए…देखा कल्पना के मुंह से झाग निकल रहा है! अफरा-तफरी में डॉक्टरों की मदद ली गयी…बचना मुश्किल था पर भगवान् को कुछ और ही मंजूर था और उनकी जान बच गयी!
यहीं से कल्पना जी का जीवन बदल गया। उन्हें लगा की ज़िन्दगी ने उन्हें एक और मौका दिया है…. a second chance.

वो कहती हैं-

जब मैं बच गयी तो सोचा कि जब कुछ करके मरा जा सकता है तो इससे अच्छा ये है कि कुछ करके जिया जाए!

और उन्हें अपने अन्दर एक नयी उर्जा महसूस हुई, अब वो जीवन में कुछ करना चाहती थीं।इस घटना के बाद उन्होंने कई जगह नौकरी पाने की कोशिश की पर उनकी छोटी उम्र और कम शिक्षा की वजह से कोई भी काम न मिल सका, इसलिए उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया।

मुंबई की ओर कदम:


16 साल की उम्र में कल्पना जी अपने चाचा के पास मुंबई आ गयी। वो सिलाई का काम जानती थीं, इसलिए चाचा जी उन्हें एक कपड़े की मिल में काम दिलाने ले गए। उस दिन को याद करके कल्पना जी बताती हैं, “ मैं मशीन चलाना अच्छे से जानती थी पर ना जाने क्यों मुझसे मशीन चली ही नहीं, इसलिए मुझे धागे काटने का काम दे दिया गया, जिसके लिए मुझे रोज के दो रूपये मिलते थे।”
कल्पना जी ने कुछ दिनों तक धागे काटने का काम किया पर जल्द ही उन्होंने अपना आत्मविश्वास वापस पा लिया और मशीन भी चलाने लगीं जिसके लिए उन्हें महीने के सवा दो सौ रुपये मिलने लगे।
इसी बीच किन्ही कारणों से पिता की नौकरी छूट गयी। और पूरा परिवार आकर मुंबई में रहने लगा।

गरीबी की चोट:

धीरे-धीरे सबकुछ ठीक हो रहा था कि तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने कल्पना जी को झकझोर कर रख दिया। उनकी बहन बहुत बीमार रहने लगी और इलाज के पैसे न होने के कारण एक दिन उसकी मौत हो गयी। तभी कल्पना जी को एहसास हुआ कि दुनिया में सबसे बड़ी कोई बीमारी है तो वह है – गरीबी ! और उन्होंने निश्चय कर लिया कि वो इस बीमारी को अपने जीवन से हमेशा के लिए ख़त्म कर देंगी।

सफलता की तरफ कदम:


कल्पना ने अपनी जिन्दगी से गरीबी मिटाने का प्रण लिया। उन्होंने अपने छोटे से घर में ही कुछ सिलाई मशीने लगा लीं और 16-16 घंटे काम करने लगीं; उनकी कड़ी मेहनत करने की ये आदत आज भी बरकरार है।
सिलाई के काम से कुछ पैसे आ जाते थे पर ये काफी नहीं थे, इसलिए उन्होंने बिजनेस करने का सोचा। पर बिजनेस के लिए तो पैसे चाहिए होते हैं इसलिए वे सरकार से लोन लेने का प्रयास करने लगीं। उनके इलाके में एक आदमी था जो लों दिलाने का काम करता था। कल्पना जी रोज सुबह 6 बजे उसके घर के सामने जाकर बैठ जातीं। कई दिन बीत गए पर वो इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं देता था पर 1 महीने बाद भी जब कल्पना जी ने उसके घर के चक्कर लगाने नहीं छोड़े तो मजबूरन उसे बात करनी पड़ी।
उसी आदमी से पता चला कि अगर 50 हज़ार का लोन चाहिए तो उसमे से 10 हज़ार इधर-उधर खिलाने पड़ेंगे। कल्पना जी इस चीज के लिए तैयार नहीं थीं और इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर एक संगठन बनाया जो लोगों को सराकरी योजनाओं के बारे में बताता था और लोन दिलाने में मदद करता था। धीरे-धीरे ये संगठन काफी पोपुलर हो गया और समाज के लिए निःस्वार्थ भाव से काम करने के कारण कल्पना जी की पहचान भी कई बड़े लोगों से हो गयी।
उन्होंने खुद भी महाराष्ट्र सरकार द्वारा चलायी जा रही महात्मा ज्योतिबा फुले योजना के अंतर्गत 50,000 रूपये का कर्ज लिया और 22 साल की उम्र मे फर्नीचर का बिजनेस शुरू किया जिसमे इन्हें काफी सफलता मिली और फिर कल्पना जी ने एक ब्यूटी पार्लर भी खोला। इसके बाद कल्पना जी ने स्टील फर्नीचर के एक व्यापारी से दोबारा विवाह किया लेकिन वे 1989 में एक पुत्री और एक पुत्र का भार उन पर छोड़ कर वे इस दुनिया से चले गये।

बड़ी कामयाबी:

एक दिन एक आदमी कल्पना जी पास आया और उसने अपना प्लाट 2.5 लाख का बेचने के लिए लिए कहा।कल्पना जी ने कहा मेरे पास 2.5 लाख नही है ,उसने कहा आप एक लाख मुझे अभी दे दीजिये बाकी का आप बाद में दे दीजियेगा। कल्पना जी ने अपनी जमा पूंजी और उधार मांगकर 1 लाख उसे दिए लेकिन बाद में उन्हें पता चला की ज़मीन विवादस्पद है, और उसपर कुछ बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने 1.5-2 साल दौड़-भाग करके उस ज़मीन से जुड़े सभी मामले सुलझा लिए और 2.5 लाख की कीमत वाला वो प्लाट रातों-रात को 50 लाख का बन गया।

हत्या की साजिश:


एक औरत का इनती महंगी ज़मीन का मालिक बनना इलाके के गुंडों को पचा नहीं और उन्होंने कल्पना जी की हत्या की साजिश बना डाली। पर ये उनके अच्छे कर्मों का फल ही था कि हत्या से पहले किसी ने इस साजिश के बारे में उन्हें बता दिया और पुलिस की मदद से वे गुंडे पकड लिए गए।

इसके बाद कल्पना जी अपने पास एक लाइसेंसी रिवाल्वर भी रखने लगीं. उनका कहना था कि मैं बाबा साहेब के इस वचन में यकीन रखती हूँ कि-

सौ दिन भेड़ की तरह जीने से अच्छा है एक दिन शेर की तरह जियो।

आत्महत्या के प्रयास के दौरान वो मौत को इतनी करीब से देख चुकी थीं कि उनके अन्दर से मरने का डर कबका खत्म हो चुका था, उन्होंने अपने दुश्मनों को साफ़-साफ़ चेतावनी दे दी –

इससे पहले की तुम मुझे मारो जान लो की मेरी रिवाल्वर में 6 गोलियां हैं। छठी गोली ख़त्म होने के बाद ही कोई मुझे मार सकता है।

ये मामला शांत होने के बाद उन्होंने ज़मीन पर construction करने की सोची पर इसके लिए उनके पास पैसे नहीं थे इसलिए उन्होंने एक सिन्धी बिजनेसमैन से पार्टनरशिप कर ली। उन्होंने कहा जमीन मेरी है और बनाना आपको है। उसने मुनाफे में 65% अपना और 35 % उनका पर बात मान ली इस प्रकार से कल्पना जी ने 4.5 करोड़ रूपये कमाए।

कमानी ट्यूब्स की बागडोर:


Kamani Tubes की नीव Shri N.R Kamani द्वारा 1960 में डाली गयी थी। शुरू में तो कम्पनी सही चली पर 1985 में labour unions और management में विवाद होने के कारण में ये कम्पनी बंद हो गयी। 1988 में supreme court के आर्डर के बाद इसे दुबारा शुरू किया गया पर एक ऐतिहासिक फैसले में कम्पनी का मालिकाना हक workers को दे दिया गया। Workers इसे ठीक से चला नहीं पाए और कम्पनी पर करोड़ों का कर्ज आता चला गया।
इस स्थिति से निकलने के लिए कमानी ट्यूब्स कम्पनी के workers सन 2000 में कल्पना जी के पास गये। उन्होंने सुन रखा था कि कल्पना सरोज अगर मिट्टी को हाथ लगा दे तो मिट्टी भी सोना बन जाती है।
कल्पना जी ने जब जाना कि कम्पनी 116 करोड़ के कर्ज में डूबी हुई है और उस पर 140 litigation के मामले हैं तो उन्होंने उसमे हाथ डालने से मन कर दिया पर जब उन्हें बताया गया कि इस कम्पनी पर 3500 मजदूरों और उनके परिवारों का भविष्य निर्भर करता है और बहुत से workers भूख से मर रहे हैं और भीख मांग रहे हैं, तो वो इसमें हाथ डालने को तैयार हो गयीं।
बोर्ड में आते ही उन्होंने सबसे पहले 10 लोगों की कोर टीम बनायी, जिसमे अलग-अलग फील्ड के एक्सपर्ट थे। फिर उन्होंने एक रिपोर्ट तैयार करायी कि किसका कितना रुपया बकाया है; उसमे banks के ,government के और उद्योगपतियों के पैसे थे। इस प्रक्रिया में उन्हें पता चला कि कंपनी पर जो उधार था उसमे आधे से ज्यादा का कर्जा पेनाल्टी और इंटरेस्ट था।
कल्पना जी तत्कालीन वित्त मंत्री से मिलीं और बताया कि कमानी इंडस्ट्रीज के पास कुछ है ही नही, अगर आप interest और penalty माफ़ करा देते हैं, तो हम creditors का मूलधन लौटा सकते हैं। और अगर ऐसा न हुआ तो कोर्ट कम्पनी का liquidation करने ही वाला है, और ऐसा हुआ तो बकायेदारों को एक भी रुपया नही मिलेगा।

वित्त मंत्री ने बैंकों को कल्पना जी के साथ मीटिंग करने के निर्देश दिए। वे कल्पना जी की बात से प्रभावित हुए और न सिर्फ ने सिर्फ penalty और interests माफ़ किये बल्कि एक lady entrepreneur द्वारा genuine efforts को सराहते हुए कर्ज मूलधन से भी 25% कम कर दिया।


कल्पना जी 2000 से कम्पनी के लिए संघर्ष कर रही थीं और 2006 में कोर्ट ने उन्हें कमानी इंस्ट्रीज का मालिक बना दिया। कोर्ट ने ऑडर दिया कि कल्पना जी को 7 साल में बैंक के लोन चुकाने के निर्देश दिए जो उन्होंने 1 साल में ही चुका दिए। कोर्ट ने उन्हें वर्कर्स के बकाया wages भी तीन साल में देने को कहे जो उन्होंने तीन महीने में ही चुका दिए। इसके बाद उन्होंने कम्पनी को modernize करना शुरू किया और धीरे-धीरे उसे एक सिक कंपनी से बाहर निकाल कर एक profitable company बना दिया। ये कल्पना सरोज जी का ही कमाल है कि आज कमानी ट्यूब्स 500 करोड़ से भी ज्यादा की कंपनी बन गयी है।
उनकी इस महान उपलब्धि के लिए उन्हें 2013 में पद्म श्री सम्मान से भी नवाज़ा गया और कोई बैंकिंग बैकग्राउंड ना होते हुए भी सरकार ने उन्हें भारतीय महिला बैंक के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स में शामिल किया।

सचमुच, कल्पना जी की ये कहानी कल्पना से भी परे है और हम सभी को सन्देश देती है कि आज हम चाहे जैसे हैं, पढ़े-लिखे…अनपढ़ …अमीर..गरीब…इन सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता… हम अपनी सोच से… अपनी मेहनत से अपनी किस्मत बदल सकते हैं…हम असंभव को भी संभव बना सकते हैं और अपने बड़े से बड़े सपनो को भी पूरा कर सकते हैं!

Friday, 16 March 2018

महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का प्रेरणादायी जीवन


"मै अभी और जीना चाहता हूँ।"

ये कथन किसी और के नहीं विश्व के महान वैज्ञानिकों में से एक स्टीफन हॉकिंग के हैं, जो उन्होंने अपने 70 वें जन्म दिन के दिन कहे थे, जिसे सुन के दुनिया एक पल के लिए अचंभित सी रह गयी। आइये आज हम इस प्रतिभावान वैज्ञानिक के प्रेरणादायक जीवन के बारे में जानते हैं ।

8 जनवरी सन_ 1942 के दिन इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड शहर में फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग दंपत्ति के यहाँ स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म हुआ, गौरतलब है कि विश्व के एक अन्य महान वैज्ञानिक गलीलियो गेलीली और स्टीफन हॉकिंग की जन्म तिथि एक ही है।बचपन से ही हॉकिंग असीम बुद्धिमत्ता से भरे हुए थे जो लोगो को चौका देती थी । हॉकिंग अपने पिता फ्रेंक द्वारा लिए एक दत्तक पुत्र और अपनी दो बहनों में सबसे बड़े थे।उनके पिता डॉक्टर थे और माँ एक हाउस वाइफ थीं। स्टीफन हॉकिंग की बुद्धि का परिचय इसी बात से लगाया जा सकता है की बचपन में लोग उन्हें “आइंस्टीन” कह के पुकारते थे।
जब हॉकिंग पैदा होने वाले थे तब उनका परिवार लन्दन में था लेकिन दुसरे विश्व युद्ध के कारण वो ऑक्सफ़ोर्ड में आके बस गए, और 11 साल बाद सेंट एलेबेस में आ गए जहा हॉकिंग की शुरुआती शिक्षा हुई ।बचपन से ही स्टीफन गणित विषय में गहरी रूचि थी ,लेकिन उनके पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे ।खैर उस समय गणित विषय न होने के कारण उन्होंने आगे की पढाई भौतिकी विषय लेकर शुरू की और आगे जा के भारतीय वैज्ञानिक “जयंत नार्लीकर “ के सलाह से उन्होंने अपने मनपसंद विषय गणित को ध्यान में रख कर कोस्मोलोजी विषय का चयन किया ।उन्होंने अपनी पी.एच.डी के लिए ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की परीक्षा पास की और अपनी आगे की पढाई शुरू की।

जब वो 21 साल के थे तो एक बार छुट्टिय मानाने के मानाने के लिए अपने घर पर आये हुए थे , वो सीढ़ी से उतर रहे थे की तभी उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वो तुरंत ही नीचे गिर पड़े।उन्हें डॉक्टर के पास ले जायेगा शुरू में तो सब ने उसे मात्र एक कमजोरी के कारण हुई घटना मानी पर बार-बार ऐसा होने पर उन्हें बड़े डोक्टरो के पास ले जाया गया , जहाँ ये पता लगा कि वो एक अनजान और कभी न ठीक होने वाली बीमारी से ग्रस्त है जिसका नाम है न्यूरॉन मोर्टार डीसीस ।इस बीमारी में शारीर के सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है।और अंत में श्वास नली भी बंद हो जाने से मरीज घुट घुट के मर जाता है।
डॉक्टरों ने कहा हॉकिंग बस 2 साल के मेहमान है। लेकिन हॉकिंग ने अपनी इच्छा शक्ति पर पूरी पकड़ बना ली थी और उन्होंने कहा की मैं 2 नहीं २० नहीं पूरे ५० सालो तक जियूँगा । उस समय सबने उन्हें दिलासा देने के लिए हाँ में हाँ मिला दी थी, पर आज दुनिया जानती है की हॉकिंग ने जो कहा वो कर के दिखाया ।
अपनी इसी बीमारी के बीच में ही उन्होंने अपनी पीएचडीपूरी की और अपनी प्रेमिका जेन वाइल्ड से विवाह किया तब तक हॉकिंग का पूरा दाहिना हिस्सा ख़राब हो चूका था वो stick के सहारे चलते थे ।
अब हॉकिंग ने अपने वैज्ञानिक जीवन का सफ़र शुरू किया और धीरे धीरे उनकी ख्याति पूरी दुनिया में फैलने लगी। लेकिन वही दूसरी और उनका शरीर भी उनका साथ छोड़ता चला गया धीरे – धीरे उनका बायाँ हिस्सा भी बंद पड़ गया।लेकिन उन्होंने इन सब चीजों पे ध्यान न देकर अपनी विज्ञान की दुनिया पे ही ध्यान दिया। बीमारी बढ़ने पर उन्हें व्हील चेयर की जरूरत हुई , उन्हें वो भी दे दी गयी और उनकी ये चेयर तकनिकी रूप से काफी सुसज्जित थी।

लोग यूँही देखते चले गए और हॉकिंग मौत को मात पे मात देते रहे ।। उनकी इच्छा शक्ति ने मानो उन्हें मृत्युंजय बना दिया हो । इसी बीच हॉकिंग तीन बच्चो के पिता भी बने। यही कहा जा सकता है हॉकिंग सिर्फ शारीरिक रूप से अपांग हुए थे ना की मानसिक रूप से । उन्होंने अपनी बीमारी को एक वरदान के रूप में लिया।वो अपने मार्ग पे आगे बढ़ते चले गए और दुनिया को दिखाते चले गये की उनकी इच्छा शक्ति और उनकी बुद्धि मत्ता कम नहीं आंकी जा सकती ।

उन्होंने ब्लैक होल का कांसेप्ट दुनिया को दिया, उन्होंने हॉकिंग रेडिएशन का विचार भी दुनिया को दिया । और उनकी लिखी गयी किताब “A BRIEF HISTORY OF TIME “ ने दुनिया भर के विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया।

सन 1995 में उनकी पहली पत्नी जेन वाइल्ड ने उन्हें तलाक दे दिया और हॉकिंग की दूसरी शादी हुई इलियाना मेसन से जिन्होंने उन्हें 2006 में तलाक दिया। पहली से पत्नी तलाक मिलने का कारण यह मन जाता है की जेन एक धार्मिक स्त्री थी जबकि हॉकिंग हमेशा से भगवान के अस्तित्व को चुनौती देते थे।जिसके कारण दुनिया भर में हॉकिंग की काफी किरकिरी भी हुई लेकिन इन सब से दूर हॉकिंग अपनी खोजो पे आगे बढ़ते गये और दुनिया को बता दिया की अपंगता तन से होती है मन से नहीं।

हॉकिंग का IQ 160 है जो किसी जीनियस से भी कहीं ज्यादाहै। 2007 में उन्होंने अंतरिक्ष की सैर भी की । जिसमे वो शारीरिक तौर पे “फिट “ पाए गए। आज उन्हें भौतिकी के छोटे बड़े कुल 12 पुरस्कारों से नवाज़ा जा चूका है।लेकिन आज भी वो बस अपनी इच्छा शक्ति के दम पे अपनी जिन्दगी जिए जा रहे है और हमारी यही दुआ है की वो ऐसे ही जीते रहे और हमे नित नयी


खोजों से अवगत कराते रहें।


बड़े दुःख के साथ हमें इस पोस्ट को अपडेट करना पड़ रहा है कि 14 मार्च 2018 को 76 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।



Wednesday, 14 March 2018

जैक मा – अलीबाबा संस्थापक की प्रेरणादायक कहानी



हेलो दोस्तों 
        हम बात करनेवाले हैं अलीबाबा ग्रुप के फाउंडर Jack Ma के बारे में, उनके चीन के एक छोटे से गाँव से निकल कर चीन की सबसे बड़ी कंपनी को स्थापित करने के सफ़र के बारे में ।
लगातार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः उन्होंने जो मुकाम हासिल किया वो हर इंटरप्रेन्योर (उद्यमी) और हर एक स्टूडेंट के लिए प्रेरणा स्रोत है ।उन्होंने नौकरी के लिए लगभग 30  से ज्यादा बार रिजेक्ट होने के बाद भी हिम्मत ना हार कर संघर्ष किया और आश्चर्य चकित कर देनेवाली सफलता की एक नई कहानी गढ़ दी ।

Jack Ma वर्तमान में एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं, अगस्त 2017 में उनकी संपत्ति करीब 36. 4  बिलियन अमेरिकी डॉलर है ।
बिज़नेस दुनिया की प्रसिद्ध मैगजीन “फार्च्यून” ने 2017 की दुनिया के 40  महान लीडर्स लिस्ट में दूसरा स्थान दिया गया है । दुनिया में व्यवसायियों और स्व-उद्धिमीयों में से Jack Ma एक बहुत ही प्रभावशील व्यक्ति हैं ।
वे परोपकारी कार्यो के साथ साथ नई पीढ़ी को बिज़नेस के गुर सिखाने के लिए भी मशहूर हैं ।

बचपन (Childhood)


Jack Ma का जन्म चीन के एक बहुत छोटे-से गाँव में १० सितम्बर १९६४ में हुआ था । उन्होंने बचपन गरीबी का हर वो चेहरा देखा जिसकी कल्पना करना भी हमारे लिए मुश्किल है ।
उन्हें बचपन से ही इंग्लिश भाषा को सीखने, समझने में बहुत दिलचस्पी थी । उस समय कम्युनिस्ट देश चीन की प्रमुख भाषा चीनी ही थी और ६० के दशक में चीनी भाषा को ही महत्व दिया जाता था । इंग्लिश भाषा को सीखने-पढने पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था नाही इसको जरूरी समझा जाता था ।
बावजूद इसके लगभग १३ साल ही उम्र से ही उन्होंने अंग्रेजी सीखना शुरू कर दिया, बजाये किसी इंग्लिश के शिक्षक के उन्होंने विदेशों से आने वाले टूरिस्ट्स की मदद करना शुरू कर दी और एक टूरिस्ट गाइड की भूमिका निभाने लगे ।
पश्चिमी देशों से आये टूरिस्ट्स से इंग्लिश भाषा में बात करने में शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें आयी पर फिर कोशिश करते रहने से उनकी टूटी-फूटी अंग्रेजी में सुधार हो गया ।
उनका बचपन में नाम “मायून” था पर विदेशी पर्यटकों के लिए ये चीनी नाम उच्चारण करने में कठिन था । एक बार उनकी एक विदेशी पर्यटक से उनकी मित्रता हो गई और उसने ही उन्हें “Jack” नाम दिया ।
9 वर्ष तक उन्होंने एक टूरिस्ट गाइड की तरह काम किया जिससे उन्हें पश्चिमी देशों संस्कृति के साथ साथ इंग्लिश की भी बहुत अच्छी समझ हो गई ।

व्यवसाय की शुरुआत (Career)


Jack Ma शुरुआती दिनों में नौकरी की तलाश में भटक रहे थे, पुलिस की नौकरी के लिए भी उन्होंने आवेदन किया था । पर उनकी शारीरिक क्षमता इस नौकरी के अनुरूप ना होने के कारण उन्हें वहां से भी निराशा ही हाथ लगी ।
जैक मा जब अमेरिका गए तो उन्हें वहाँ इंटरनेट के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त हुई, हालाँकि उन्होंने इसके बारे में पहले से सुन रखा था, पर अब उन्हें इसको उपयोग करने का मौका मिला ।
उन्होंने इंटरनेट पर जो पहला शब्द टाइप किया वो था BEER (भालू) । उन्होंने पाया कि दुनिया के बहुत से देशों के भालुओं के बारे में उन्हें जानकारी मिल गई, पर चीन में पाए जानेवाली प्रजातियों के बारे में कोई जानकारी उस वक्त तक इंटरनेट पर मौजूद नहीं थी ।
फिर उन्होंने अलग-अलग चीजें चीन के बारे में सर्च की । पर इंटरनेट पर चीन के बारे में बहुत ही कम जानकारी उपलब्ध थी । जो उन्हें अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अपने कुछ मित्रों की मदद से एक वेबसाइट बनाई जो चीन के बारे में जानकारियां देती थी ।
महज कुछ ही घंटो के अन्दर उन्हें बहुत से ईमेल प्राप्त हुए जो लोग Jack के बारे में जानना चाहते थे । अब तक Jack को इंटरनेट की अनंत संभावनाओं का एहसास हो चुका था । इस से पहले वो एक ट्रांसलेशन (अनुवाद) करनेवाली एक छोटी सी एजेंसी चलाते थे । अब जैक इंटरनेट की मदद से कुछ नया करना चाहते थे ।
सन 1995 में जैक ने अपने कुछ मित्रों और पत्नी की मदद से 20000 डॉलर जमा किये जिसमे उनकी अपनी बहन से लिए हुए पैसे भी शामिल थे और एक नई वेबसाइट बनाई जो चीन में जो छोटी-बड़ी कंपनियां थी उनको वेबसाइट बनाकर देती थी । इसका नाम उन्होंने “China Yellow Pages” रखा । वांछित लाभ ना मिलने के कारण यह व्यवसाय भी असफल हो गया ।

अलीबाबा कंपनी की शुरुआत (Alibaba Startup)


कुछ दिन सरकारी काम करने के बाद वे वापस गाँव आ गए और उन्होंने अपने 17 मित्रों को इन्वेस्ट करने के लिए रजामंद किया । और इस तरह उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिल कर “Alibaba” कंपनी (उस वक़्त एक स्टार्टअप) की नींव रखी ।
शुरुआती दौर में इस कंपनी का ऑफिस अपना खुद का अपार्टमेंट बनाया । इन दिनों अपने मित्रों के इन्वेस्टमेंट के अलावा उनके पास कोई और पूंजी का माध्यम नहीं था परन्तु बाद में 1991 तक कुछ दूसरी कंपनियों की मदद से उनका निवेश 25 मिलियन डॉलर और बढ़ गया ।
चीन के लोगो का विश्वास जीतने और उन्हें इंटरनेट पर व्यवसाय करना सिखाने के बाद अब ये कम्पनी दुनिया की वृहदतम कंपनियों में से एक बन चुकी है ।
एक छोटे से गाँव के लड़के का सफ़र जिसके पास खर्च ने के लिए एक रुपया भी नहीं था वो इतनी बड़ी कंपनी को स्थापित करने में सफल हुआ सिर्फ इस वजह से क्योंकि उसमे जज्बा था कुछ कर दिखाने का, उसमे ललक थी कुछ कर जाने की और सबसे जरूरी उसमे जिज्ञासा थी हर वक़्त कुछ नया सीखने की ।
जिस इंसान में तलब है सीखने की उसका सफलता की बुलंदियाँ छूना तय है । वो हजार बार असफल होकर भी एक ना एक दिन सफलता के वो पायदान पर पहुँच जाता है जो हमें असंभव जान पड़ते हैं ।

जैक मा की असफलताओं की सीढियाँ (Failures of Jack Ma)


Jack Ma कोई रातों-रात अचानक से कामयाब नहीं हुए उनकी असफलताओं (Failures) की भी एक लम्बी सूची है । और अगर आपको लगता है कि असफलताएं सिर्फ आपको ही मिलती हैं तो जरा Jack Ma के बारे में ये बातें भी जान लीजिये जो उन्हें एक बड़ा योद्धा बनाती है अपनी असफलताओं से लड़ने के लिए ।
वो प्राइमरी स्कूल में भी फेल हुए – एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार । जब मिडिल school  में पहुंचे तो ये आंकड़ा और बढ़ गया – और वो तीन बार मिडिल स्कूल में भी फेल हुए ।
जैसे-तैसे स्कूल ख़त्म करके कॉलेज में प्रवेश करने का सोचा तो तीन बार एंट्रेंस एग्जाम में फेल हुए । तक़रीबन १० बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के लिए अप्लाई किया पर हर बार उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया । कॉलेज के बाद भी उनकी हालात सुधरे नहीं और वो लगभग 30  बार job  के लिए apply किया पर जॉब पाने में भी फेल होते गए ।
उसके बाद खुद का बिज़नेस करने का सोचा और उन्हें शुरूआती दो बार फिर बिज़नेस में असफलता ही हाथ लगी । और यही असफलतायें उनकी सफलताओं के द्वार खोलती चली गई, यही असफलताएं उनकी सफलताओं की सीढियाँ बनती गई ।


जैक मा के कुछ प्रेरक विचार (Inspiring Thoughts of Jack Ma)


  1. इससे फर्क नहीं पड़ता कि मैं फेल हो गया । कम से कम मैंने कांसेप्ट को दूसरों को पास किया । यदि मैं सफल नही भी होता हूँ, तो भी कोई और सफल हो जायेगा ।
  2. इससे फर्क नहीं पड़ता कि भूतकाल कितना कठिन है, आपके पास हमेशा वो सपना होना चाहिए जो आपने पहले दिन देखा था । वो आपको प्रेरित रखेगा और आपको बचाएगा ।
  3. जब हमारे पास पैसे होते हैं तब हम गलतियाँ करना शुरू कर देते हैं ।
  4. आप यह नहीं जानते कि आप अपने जीवन में कितना कुछ कर सकते हैं ।
  5. यदि तुमने कभी कोई कोशिश ही नहीं की तो तुमको कैसे पता चलेगा कि कोई मौका है?
  6. युवाओं की मदद करो, अपने से छोटे लोगों की मदद करो क्योंकि छोटे लोग बड़े होंगे । युवाओं के दिमाग में वो बीज होगा जो आप उनमें बोयेंगे और जब वे बड़े होंगे तो वे दुनिया बदल देंगे ।
  7. दूसरों की सफलता से सीखने की बजाय उनकी गलतियों से सीखो । ज्यादातर लोग जो असफल होते हैं उनकी असफलता के कारण समान होते हैं जबकि सफलता की कई वजहें मिल सकती है
  8. याद रखें जल्दी ही, आपको इस बात का अफ़सोस होगा की आपने अपना पूरा समय काम में व्यतीत कर दिया ।
  9. ज़िंदगी बहुत छोटी है और बहुत खूबसूरत, काम के प्रति इतने गंभीर ना रहें । जीवन का आनंद लें ।
  10. हमारे पास कभी भी पैसों की कमी नहीं होती । हमारे पास कमी होती है तो सपने (Dreams) देखने वाले लोगों की ।


तो मित्रों यह थी Jack Ma की Success Story । हमें आशा है की आपको Jack Ma के जीवन से और उनकी इस Hindi Biography से बहुत ही अनमो
ल सीख हासिल हुई होंगी ।

मैं कामना करता हूँ कि आप भी Jack Ma की तरह असफलताओं के सामने एक योद्धा बनकर डटकर लड़े और विफलताओं को परास्त कर के सफलता का नया इतिहास लिखे ।

अगर आपको Jack Ma की यह Hindi Biography अच्छी लगी हो तो कृपया इसे ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँचाए और सोसिअल मीडिया पर शेयर करे । धन्यवाद ।

Tuesday, 6 March 2018

Self-confidence बढाने के 10 तरीके

हेलो दोस्तों 
          आज हम यहाँ आपको बताएंगे की ज़िन्दगी में सफल होने के लिए self-confidence कितना जरूरी है.आज तक जितने भी इंसान सफल हुए है,उनमे self-confidence की कोई भी कमी नहीं थी.फिर चाहे वो कोई cricketer हो या film star सबमे self confidence की कोई कमी नहीं थी.self confidence एक ऐसा गूढ़ है जो हर आम इंसान में होता,लेकिन उस confidence को वो इंसान किस तरह use करता है ये उसके ऊपर dipend करता है.पर ज़रुरत इस बात की है कि अपने present level of confidence को बढ़ा कर एक नए और बेहतर level तक ले जाया जाये । और आज SST(shivam sagar thinking) पर मैं आपके साथ कुछ ऐसी ही बातें share करूँगा जो आपके self confidence को बढाने में मददगार हो सकती हैं


1) अपनी Dressing improve कीजिये:


आप किस तरह से dress-up होते हैं इसका असर आपके confidence पर जरूर पड़ता है । ये बता दूँ कि यहाँ मैं अपने जैसे आम लोगों की बात कर रहा हूँ ,Dr. B.R Ambedkar और Dr. A.P.J Abdul kalam जैसे महापुरुषों का इससे कोई लेना देना नहीं है ,और यदि आप इस category में आते हैं तो आपका भी:)।

मैंने खुद इस बात को feel किया है , जब मैं अपनी best attire में होता हूँ तो automatically मेरा confidence बढ़ जाता है, इसीलिए जब कभी कोई presentation या interview होता है तो मैं बहुत अच्छे से तैयार होता हूँ । दरअसल अच्छा दिखना आपको लोगों को face करने का confidence देता है और उसके उलट poorly dress up होने पे आप बहुत conscious रहते हैं ।

2) आप वो करिए जो confident लोग करते हैं:

आपको अपने आस -पास ऐसे लोग ज़रूर दिखेंगे जिन्हें देखकर आपको लगता होगा कि ये व्यक्ति बहुत confident है । आप ऐसे लोगों को ध्यान से देखिये और उनकी कुछ activities को अपनी life में implement करिए । For example:
  • Front seat पर बैठिये ।
  • उन् लोगो से बात कीजिये जिनसे बात करने में आप खुद hesitate feel करते है.
  • Class में , seminars में , और अन्य मौके पर Questions पूछिए / Answers दीजिये
  • अपने चलने और बैठने के ढंग पर ध्यान दीजिये
  • अपने teacher या boss से अपने confusen दूर कीजिये।
  • दबी हुई आवाज़ में मत बोलिए ।
  • लड़कियों से बात करने की कोसिस कीजिये।
  • Eye contact कीजिये , नज़रे मत चुराइए।

3) अधिकतर लोगो से बेहतर बनने की कोशिश कीजिये :


ये बात तो हर कोई मानता है की हरेक field में कोई भी expert नहीं बन सकता है, लेकिन वो अपने interest के हिसाब से एक -दो areas चुन सकता है जिसमे वो औरों से बेहतर बन सकता है ।जिन field में वो और लोगो से ज्यादा confident होते है.जब मैं School में था तो बहुत से students मुझसे पढाई और अन्य चीजों में अच्छे थे ,पर मैं physics में class में सबसे अच्छा था (thanks to my dear pankaj sir :)), और इसी वजह से मैं बहुत confident feel करता था।अगर आप किसी एक चीज में महारथ हांसिल कर लेंगे तो वो आपको in-general confident बना देगा । बस आपको अपने interest के हिसाब से कोई चीज चुननी होगी और उसमे अपने circle में best बनना होगा, आपका circle आप पर depend करता है , वो आपका school, college, आपकी colony या आपका शहर हो सकता है।

आप कोई भी field चुन सकते हैं, वो कोई art हो सकती है , music, dancing, etc कोई खेल हो सकता है , कोई subject हो सकता है या कुछ और जिसमे आपकी expertise आपको भीड़ से अलग कर सके और आपकी एक special जगह बना सके । ये इतना मुश्किल नहीं है , आप already किसी ना किसी चीज में बहुतों से बेहतर होंगे , बस थोडा और मेहनत कर के उसमे expert बन जाइये, इसमें थोडा वक़्त तो लगेगा , लेकिन जब आप ये कर लेंगे तो सभी आपकी respect करेंगे और आप कहीं अधिक confident feel करेंगे ।

और जो व्यक्ति किसी क्षेत्र में special बन जाता है उसे और क्षेत्रों में कम knowledge होने की चिंता नहीं होती, आप ही सोचिये क्या कभी सचिन तेंदुलकर इस बात से परेशान होते होंगे कि उन्होंने ज्यादा पढाई नहीं की …कभी नहीं !


4) अपने achievements को याद करिए:


आपकी past achievements आपको confident feel करने में help करेंगी। ये छोटी -बड़ी कोई भी achievements हो सकती हैं । For example: आप कभी class में first आये हों , किसी subject में school top किया हो , singing completion या sports में कोई जीत हासिल की हो, कोई बड़ा target achieve किया हो , employee of the month रहे हों । कोई भी ऐसी चीज जो आपको अच्छा feel कराये ।

आप इन achievements को dairy में लिख सकते हैं, और इन्हें कभी भी देख सकते हैं, ख़ास तौर पे तब जब आप अपना confidence boost करना चाहते हैं । इससे भी अच्छा तरीका है कि आप इन achievements से related कुछ images अपने दिमाग में बना लें और उन्हें जोड़कर एक छोटी सी movie बना लें और समय समय पर इस अपने दिमाग में play करते रहे । Definitely ये आपके confidence को boost करने में मदद करेगा ।


5) Visualize करिए कि आप confident हैं:


आपकी प्रबल सोच हकीकतबनने का रास्ता खोज लेती है , इसलिए आप हर रोज़ खुद को एक confident person के रूप में सोचिये । आप कोई भी कल्पना कर सकते हैं , जैसे कि आप किसी stage पर खड़े होकर हजारों लोगों के सामने कोई भाषण दे रहे हैं , या किसी seminar hall में कोई शानदार presentation दे रहे हैं , और सभी लोग आपसे काफी प्रभावित हैं , आपकी हर तरफ तारीफ हो रही है और लोग तालियाँ बजा कर आपका अभिवादन कर रहे हैं । Albert Einstein ने भी imagination को knowledge से अधिक powerful बताया है ; और आप इस power का use कर के बड़े से बड़ा काम कर सकते हैं।


6) गलतियाँ करने से मत डरिये:


क्या आप ऐसे किसी व्यक्ति को जानते हो जिसने कभी गलती ना की हो? नहीं जानते होंगे , क्योंकि गलतियाँ करना मनुष्य का स्वभाव है , और मैं कहूँगा कि जन्मसिद्ध अधिकार भी । आप अपने इस अधिकार का प्रयोग करिए। गलती करना गलत नहीं है, उसे दोहराना गलत है । जब तक आप एक ही गलती बार -बार नहीं दोहराते तब तक दरअसल आप गलती करते ही नहीं आप तो एक प्रयास करते हैं और इससे होने वाले experience से कुछ ना कुछ सीखते हैं ।

दोस्तों कई बार हमारे अन्दर वो सब कुछ होता है जो हमें किसी काम को करने के लिए होना चाहिए , पर फिर भी failure के डर से हम confidently उस काम को नहीं कर पाते । आप गलतियों के डर से डरिये मत, डरना तो उन्हें चाहिए जिनमे इस भय के कारण प्रयास करने की भी हिम्मत ना हो !! आप जितने भी सफल लोगों का इतिहास उठा कर देख लीजिये उनकी सफलता की चका-चौंध में बहुत सारी असफलताएं भी छुपी होंगी ।

Michel Jordan, जो दुनिया के अब तक के सर्वश्रेष्ठ basketball player माने जाते हैं; उनका कहना भी है कि –

मैं अपनी जिंदगी में बार-बार असफल हुआ हूँ और इसीलिए मैं सफल होता हूँ।


आप कुछ करने से हिचकिचाइए मत चाहे वो खड़े हो कर कोई सवाल करना हो , या फिर कई लोगों के सामने अपनी बात रखनी हो , आपकी जरा सी हिम्मत आपके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा सकती है । सचमुच डर के आगे जीत है!

7) Low confidence के लिए अंग्रेजी ना जानने का excuse मत दीजिये:


हमारे देश में अंग्रेजी का वर्चस्व है । मैं भी अंग्रेजी का ज्ञान आवश्यक मानता हूँ ,पर सिर्फ इसलिए क्योंकि इसके ज्ञान से आप कई अच्छी पुस्तकें , ब्लॉग , etc पढ़ सकते हैं , आप एक से बढ़कर एक programs, movies, इत्यादि देख सकते हैं । पर क्या इस भाषा का ज्ञान confident होने के लिए आवश्यक है? नहीं । English जानना आपको और भी confident बना सकता है पर ये confident होने के लिए ज़रूरी नहीं है । किसी भी भाषा का मकसद शब्दों में अपने विचारों को व्यक्त करना होता है,और अगर आप यही काम किसी और भाषा में कर सकते हैं तो आपके लिए अंग्रेजी जानने की बाध्यता नहीं है।

दोस्तों, कुछ जगहों पर जैसे कि job-interview में अंग्रेजी का ज्ञान आपके चयन के लिए ज़रूरी हो सकता है, पर confidence के लिए नहीं , आप बिना English जाने भी दुनिया के सबसे confident व्यक्ति बन सकते हैं ।


8) जो चीज आपका आत्मविश्वास घटाती हो उसे बार-बार कीजिये:


कुछ लोग किसी ख़ास वजह से confident नहीं feel करते हैं । जैसे कि कुछ लोगों में stage-fear होता है तो कोई opposite sex के सामने nervous हो जाता है । यदि आप भी ऐसे किसी challenge को face कर रहे हैं तो इसे beat करिए । और beat करने का सबसे अच्छा तरीका है कि जो activity आपको nervous करती है उसे इतनी बार कीजिये कि वो आपकी ताकत बन जाये । यकीन जानिए आपके इस प्रयास को भले ही शुरू में कुछ लोग lightly लें और शायद मज़ाक भी उडाएं पर जब आप लगातार अपने efforts में लगे रहेंगे तो वही लोग एक दिन आपके लिए खड़े होकर ताली बजायेंगे ।

गाँधी जी की कही एक line मुझे हमेशा से बहुत प्रेरित करती रही है “पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।” तो आप भी उन्हें ignore करने दीजिये , हंसने दीजिये , लड़ने दीजिये, पर अंत में आप जीत जाइये । क्योंकि आप जीतने के लिए ही यहाँ हैं , हारने के लिए नहीं ।


9) विशेष मौकों पर विशेष तैयारी कीजिये:


जब कभी आपके सामने खुद को prove करने का मौका हो तो उसका पूरा फायदा उठाइए । For example: आप किसी debate, quiz , dancing या singing competition में हिस्सा ले रहे हों , कोई test या exam दे रहे हो ,या आप कोई presentation दे रहे हों , या कोई program organize कर रहे हों । ऐसे हर एक मौके के लिए जी -जान से जुट जाइये और बस ये ensure करिए कि आपने तैयारी में कोई कमी नहीं रखी, अब result चाहे जो भी हो पर कोई आपकी preparation को लेकर आप पर ऊँगली ना उठा पाए।

Preparation और self-confidence directly proportional हैं । जितनी अच्छी तैयारी होगी उतना अच्छा आत्म -विश्वास होगा।और जब इस तैयारी की वजह से आप सफल होंगे तो ये जीत आपके life की success story में एक और chapter बन जाएगी जिसे आप बार -बार पलट के पढ़ सकते हैं और अपना confidence boost कर सकते हैं ।


10)Daily अपना MIT(Most Importanat Task) पूरा कीजिये:


यदि आप अपना daily का MIT पूरा करते रहेंगे तो निश्चित रूप से आपका आत्म -विश्वास कुछ ही दिनों में बढ़ जायेगा । आप जब भी अपना MIT पूरा करें तो उसे एक छोटे success के रूप में देखें और खुद को इस काम के लिए शाबाशी दें ।रोज़ रोज़ लगातार अपने important tasks को successfully पूरा करते रहना शायद अपने confidence को boost करने का सबसे कारगर तरीका है । आप इसे ज़रूर try कीजिये।

Friends, ये याद रखिये कि आपका confidence आपकी education, आपकी financial condition या आपके looks पर नहीं depend करता और आपकी इज़ाज़त के बिना कोई भी आपको inferior नहीं feel करा सकता। आपका आत्म-विश्वास आपकी सफलता के लिए बेहद आवश्यक है,और आज आपका confidence चाहे जिस level हो, अपने efforts से आप उसे नयी ऊँचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।


All the best! My All friends 

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Entrepreneur बनने के लिए क्या ज़रूरी है क्या नहीं ?



मुझे ऐसे कई लोग मिलते हैं जो अकसर कुछ अपना करने की बात करते हैं, औंट्राप्रेन्योर (उद्यमी ) बनने की बात करते हैं,कोई business setup करने की बात करते हैं….ये अच्छी बात है! पर दिक्कत ये है कि वो ये बात कई महीनो या सालों से करते आ रहे हैं पर reality में इस दिशा में उन्होंने कोई भी step नहीं लिया है.

जब मैं उनसे पूछता हूँ कि भाई तुम क्या करने की planning कर रहे हो और उसे कबसे शुरू करने वाले हो? तो मुझे कुछ ऐसे जवाब मिलते हैं :



1-अभी decide नहीं किया है , बैठ कर सोचते हैं इस पर….
2-सोच रहे हैं एक school डाल दें , या फिर पापड़- अचार का काम किया जाये….या…
3-एक काम सोचे तो हैं पर कोई partner नहीं मिल रहा है…
4-तुम्ही बताओ यार क्या किया जाये…

अधिकतर लोग उस काम को ही लेकर clear नहीं होते कि वो करना क्या चाहते हैं, तो कब से शुरू करने का प्रश्न ही नहीं उठता.

ऐसा क्यों होता है कि कई लोग entrepreneur या उद्यमी बनने के बारे में बात तो करते हैं पर इस सोच को implement नहीं कर पाते:


  • Entrepreneur बनने की बात को लेकर वो serious नहीं होते…शायद ऐसा कहना कि “मैं एक entrepreneur बनना चाहता हूँ” वो बस एक fashion statement की तरह use करते हैं और असल में उनके मन में ऐसा करने की कोई इच्छा नहीं होती.
  • वो ऐसा सोचते हैं कि मैं अभी इस काम के लिए तैयार नहीं हूँ , ” मुझे experience नहीं है”, “मेरे पास अभी उतने पैसे नहीं हैं”
  • Failure का डर. “कहीं मेरा plan fail हो गया तो…..” जब Failure का डर Success की ख़ुशी से अधिक होता है तो entrepreneur बन पाना मुश्किल है.
  • मौजूदा स्थिति का सही होना. यदि job में ही ठीक-ठाक पैसे मिल रहे हैं तो व्यक्ति सोच सकता है कि risk उठाने का क्या फायदा, और वो उसी में रमा रहता है.मैं job करने को बुरा नहीं मानता, यदि आप उसमे संतुष्ट हैं तो आपके लिए वही सही है.

Successful Entrepreneur बनने के लिए क्या जरूरी है:


  • कुछ अपना करने की इच्छा होना.
  • क्या करना है इस बात को लेकर mind में clarity होना.
  • अपनी idea में पूर्ण विश्वास होना. आप जो भी करने जा रहे हैं अगर उसको लेकर आपके मन में बहुत सारे doubts हैं तो आपका सफल होना मुश्किल है.
  • Failure के लिए तैयार रहना. हो सकता है आपका आईडिया क्लिक ना करे, ऐसे में इस सिर्फ एक सबक के रूप में लें, और नयी आईडि या के साथ जुट जाएँ.
  • Backup Plan ready रखना. हम सभी कि एक risk appetite होती है, जिसके आगे हम रिस्क नहीं उठा सकते. तो यदि आपका venture fail हो जाता है तो ऐसे में आप कैसे bounce back करेंगे , इसके लिए एक plan होना जरूरी है. मेरे विचार से यदि आप किसी जॉब में हैं और साथ ही आपके पास एक business idea है जिसमे आप desperately interested हैं तो job से resign करके अपना काम शुरू करने से बेहतर होगा कि आप इस side-business के रूप में शुरू करें या आप एक लम्बी छुट्टी लेकर इस आईडिया का pilot run करें.
  • Perseverance : अपने काम को लेकर दृढ रहे. बीच में कई बार ऐसा लग सकता है कि आप सफल नहीं हो पायेंगे, लेकिन ऐसे मौकों पर आपको खुद से positive talk करनी होगी, ज्यादातर entrepreneurs इसी qualityके ना होने की वजह से सफल नहीं हो पाते. वो कभी ये जान ही नहीं पाते कि अगर वो कुछ देर और हिम्मत नहीं हारते और टिक कर काम करते तो वो एक सफल व्यवसाई होते.
  • थोडा सा luck. पहले मैं luck को उतना importance नहीं देता था, पर मेरे कुछ ऐसे experience रहे हैं कि मुझे लगता है कि ये भी एक important factor है.


Entrepreneurship से सम्बंधित कुछ myths :


  • Entrepreneurs पैदा होते हैं बनाये नहीं जा सकते: ऐसा नहीं है. कोई भी कभी भी एक उद्यमी बन सकता है.
  • Entrepreneur बनने के लिए किसी innovative idea का होना जरूरी है: ऐसा बिलकुल नहीं है ,आप औरों द्वारा successfully implement किये गए ideas को उठा कर दुबारा अपने तरीके से implement करके भी एक सफल उद्यमी बन सकते हैं.
  • उद्यमी बनने के लिए experience का होना ज़रूरी है: ऐसा भी आवश्यक नहीं है. Suhas Gopinath, जिनकी success story मैंने इस ब्लॉग पर आपके साथ share की हुई है, इसका एक जीता जागता उदाहरण हैं कि छोटी सी उम्र में भी multi million dollar company खड़ी की जा सकती है.
  • Entrepreneur बनने के लिए किसी चीज को लेकर passionate होना जरूरी है: मेरे हिसाब से ऐसा जरूरी नहीं है, पर ऐसा जरूर है कि यदि आप passionate होंगे तो आपके business के successful होने के chances कई गुना बढ़ जायेंगे. for example हम सब जानते हैं कि Kapil Dev का passion cricket है पर वो एक सफल उद्यमी भी हैं, चंडीगढ़ में उनका hotel business है. जरूरत है अपने business में interest लेने की और उसमे efforts लगाने की ,पर यदि आप passionate भी हैं तो ये सोने पे सुहागा होने वाली बात है. Entrepreneur बनना एक logical decision है, जितना effort आप अपनी नौकरी में लगाते हैं उतना अगर अपने business में लगाएं तो शायद कहीं ज्यादा earn कर सकते हैं.
  • Entrepreneur बनने के लिए किसी तरह की पढाई-लिखाई या training होना आवश्यक है: ये भी आवश्यक नहीं है है. Shri Mahila Griha Udyog Lijjat Papad की स्थापना कुछ अनपढ़ महिलाओं द्वारा ही की गयी थी , और आज इसका turnover 650 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है.
  • अपना business शुरू करने से पहले सब कुछ perfectly planned होना चाहिए: ये भी एक मिथक है. कई लोग इसी चक्कर में on field कुछ करने के से पहले अपना सारा time on paper discussion करने में ही लगा देते हैं. जरूरत है कि कुछ आगे की planning करके अपना काम शुरू करने की, बाद में खुद बखुद रास्ते बनते जाते हैं.
  • Business करके रातों रात करोडपति बना जा सकता है: बिलकुल गलत. किसी व्यवसाय में सबसे पहले आपको value create करनी होती है.और फिर उसे sell करना होता है.और ये सब करने में कई साल भी लग सकते हैं. Business अमीर बनने का रास्ता है पर shortcut नहीं.

यदि आप भी एक entrepreneur बनना चाहते हैं या कभी भविष्य में ऐसा करने की इच्छा रखते हैं तो उम्मीद है ये लेख आप के लिए कुछ मददगार होगा.



निवेदन: यदि आपके पास भी entrepreneurship से सम्बंधित कुछ अच्छी बातें हैं तो comment के ज़रिये ज़रूर share करें.

Monday, 5 March 2018

सक्सेस पानी है तो तोड़िए कम्फर्ट जोन की जंजीरें!


हेलो दोस्तों 
       एक कप चाय, मौसम के अनुरूप गर्म या ठंडा कमरा, आरामदेह बिस्तर और कानों में धीमा संगीत। क्या इससे बेहतर जिन्दगी हो सकती है। यकीनन आप का उत्तर होगा, “नहीं”।

अब एक मिनट ठहरिये और सोचिये… अगर हेमशा ऐसा ही रहे तो क्या इससे बद्तर जिंदगी हो सकती है। यकीनन इस बार भी आप का उत्तर होगा, “नहीं” । थोड़ी देर के लिए तो यह सब अच्छा लगता है। पर अगर ऐसे ही रहना पड़े तो यह बहुत दर्दनाक है। क्यों है ना ? हाँ, क्योंकि इस जिंदगी में कोई विकास नहीं है, कोई संभावना नहीं है, कोई ऐडवेंचर नहीं है।
याद है जब हम लोग बचपन में अपने मम्मी – पापा की अँगुली पकड़ कर मेला देखने जाते थे तो रोलर कोस्टर में चढने में बहुत मजा आता था। कभी ऊपर, बहुत ऊपर तो कभी नीचे बहुत नीचे। वो मजा जमीन पर एकसमान चलने में कहाँ। पर बड़े होते ही हम अपने को कटघरे में बंद करना शुरू कर देते हैं-

हमसे ये नहीं हो सकता, हमसे वो नहीं हो सकता। फिर मोनोटोनस जिन्दगी से ऊब कर खामखाँ में ईश्वर को दोष देते रहते हैं। उसने पड़ोसी को सब कुछ दिया है पर हमारे भाग्य में… ?

आपने ये कहावत सुनी होगी, “ऊपर वाला जब भी देता है छप्पर फाड़ कर देता है। ” लेकिन जरा सोचिये कि अगर आप का छप्पर ही छोटा हो तो बेचारे ईश्वर भी क्या कर पायेंगे। यहाँ छप्पर से मेरा तात्पर्य झोपड़ी या महल की छत से नहीं है बल्कि सोच से है। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर आप छोटा सोचते हैं या किसी भी बदलाव से इंकार करते हैं तो आप जीवन में तरक्की नहीं कर पायेंगे।
कहा भी गया है कि “change is the only constant.. केवल परिवर्तन ही अपरिवर्तनशील है “।
फिर भी कई लोग बातें तो बड़ी -बड़ी करेंगें पर अपने जीवन में परिवर्तन जरा सा भी स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसे लोग नयी परिस्तिथियों को स्वीकार न कर पाने की वजह से आने वाले हर मौके को गँवा देते हैं। फिर निराशा और अवसाद से घिर जाते हैं। कभी सोचा है, क्यों होता हैं ऐसा ? इसके पीछे बस एक ही कारण है उनका कम्फर्ट जोन।


क्या है ये कम्फर्ट जोन?

किसी भी इंसान का बदलाव को अस्वीकार करने का सीधा सा अर्थ है कि वो बने –बनाये ढर्रे में चलना चाहता है जिसे हम सामान्यत : कम्फर्ट जोन कहते हैं। हम इसमें जीने की इतनी आदत डाल लेते हैं कि उसके इतर कुछ सोचते ही नहीं। ये कम्फर्ट जोन, सीमित सोच का एक छोटा सा दायरा है जिसे हमने अपने चारों और खींचा हुआ है। इतने संकरे दायरे से हमारा यह लगाव, हमारे संकल्पों में डर की मिलावट कर देता है। हम इस दायरे से बाहर कुछ भी स्वीकार करने से डरते हैं।

वास्तव में देखा जाए तो कम्फर्ट जोन एक ख़ास मानसिक अवस्था है।हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इसमें इतनी बुरी तरह से जकड़े हुए होते हैं कि जब हम इसके अंदर रहते हैं तो हमें किसी एक्साइटमेंट का गहरा अनुभव नहीं होता ….न उत्साह, न जोश, न् जूनून, न ही प्रेम,न ही लगाव,न ही डर, न घबराहट,न दुःख, न सुख। सब कुछ यंत्रवत।

सुबह उठे ब्रश किया,नाश्ता किया ऑफिस गए,रुटीनल काम किया, घर आये खाना खाते हुए टी.वी देखा और सो गए। या यूं कहे जिंदगी एक ढर्रे में कटती है। इसलिए स्ट्रेस लेवल बहुत कम रहता है। क्योंकि जब भी हम कुछ नया सोचते हैं करना चाहते हैं या किसी उपरोक्त भावों में से किसी भाव को गहराई से फील करते हैं तो हमारा स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है।

कैसे बनती है ये कम्फर्ट जोन?

एक नन्हा सा बच्चा हमेशा कुछ नया करना चाहता है, हर काम अलग –अलग तरीके से करना चाहता है। तुरंत, माता –पिता टोकते हैं नहीं ऐसे नहीं करते। स्कूल जाता हैं टीचर टोकती हैं नहीं ऐसे नहीं करते। बड़े भाई-बहन बताते है उसकी क्या बात सही है क्या गलत है, यह सिलसिला पूरी जिंदगी चलता रहता है। बच्चा वही करने लगता है जो दूसरे कहते हैं क्योंकि उसके अन्दर से डर जाता है कि अगर वो, वो सब नहीं करेगा जो कहा जा रहा है तो समाज में सबसे अलग –थलग, अटपटा सा लगेगा, लोग उसका नकारात्मक मूल्याङ्कन करेंगे। उसे समा द्वारा अस्वीकार किये जाने का भय बैठ जाता है।

कभी –कभी पेरेंट्स और टीचर्स अपनी बात मनवाने के लिए बच्चे को मार कर, सजा देकर उस पर दवाब डालते हैं। धीरे –धीरे बच्चा सोसाइटी के बनाये हुए कानून पर चलने लगता है। कुछ हद तक यह सही भी है कि इस तरह वो एक समाज द्वारा स्वीकृत नागरिक बन जाता है। पर वही बच्चा बड़ा होकर समाज द्वारा अस्वीकृत होने के भय से कुछ भी नया करने से डरता है।

पापा ने कहा है डॉक्टर बनना है…. सो बनना है। भले ही मन आर्टिस्ट बनने का कर रहा हो। शादी मम्मी की पसंद से करनी है।भले ही अपने द्वारा पसंद की गयी लड़की/ लड़के को सारी उम्र के लिए भूलना पड़े।

बड़ी बेरहमी से दबा दी जाती है भावनाएं कुछ नया या अपनी इच्छा से कुछ करने की क्योंकि लोग क्या कहेंगे का भय मन पर हावी रहता है।

क्यों तोडें कम्फर्ट जोन?

क्योंकि तभी आप अपने असली मूल्य का पता लगा सकते हैं… क्योंकि तभी आप अपने अन्दर छिपी आपार सम्भावनाओं को पहचान सकते हैं। जरा सोचिये अगर एक नदी अपने आराम के लिए सिर्फ सीधी रेखा में चलती तो क्या वो कभी सागर तक पहुँच पाती? नहीं, इसीलिए वो जहाँ काट पाए पत्थर को काट देती है,जहाँ पत्थर नहीं कट सका वहाँ धारा की दिशा बदल देती है, कहीं जरूरत समझी तो थोड़ा सा उलटी दिशा में बह कर अनुकूल स्थान देख कर वापस सही दिशा ले लेती है। नदी हमें सीखाती है अपने कम्फर्ट जोन को तोड़कर हर परिस्तिथि में हर तरीके से आगे बढ़ना… अपने लक्ष्य तक पहुंचना।

कम्फर्ट जोन तोड़ने के फायदे

आप के काम की क्षमता बढ़ जाती है।
जीवन में जब कुछ अचानक से नया घट जाता है तो आप उस के साथ आप आसानी से अनुकूलन बिठा लेते हैं।
अगर आप भविष्य में कुछ नया करना चाहते हैं तो आसानी से कर सकते हैं।
आप अपनी रचनात्मकता को आसानी से बढ़ा सकते है।
सबसे ख़ास बात, आप जिंदगी काटते नहीं जीते हैं।
क्यों मुश्किल है कम्फर्ट ज़ोन तोडना : एक महत्वपूर्ण प्रयोग

कम्फर्ट जोन को लेकर एक बड़ा ही प्रसिद्द प्रयोग हुआ। उसमें पाया गया कि जब हम कम्फर्ट जोन में रहते हुए काम करते हैं तो हमारे तनाव का लेवल सामान्य रहता है। इसे मिनिमम एंग्जायटी लेवल भी कह सकते हैं। इसमें हम आराम से जीते हैं। अगर हम इससे बाहर निकलने के लिए स्ट्रेस का लेवल थोड़ा बढ़ा ले तो हमारी परफोर्मेंस में सुधार आता है। यह स्थान हमारे कम्फर्ट जोन के जस्ट बाहर होता है जिसे मैक्सिमम एंग्जायटी लेवल कहते हैं। यानी इतने स्ट्रेस को हमारा शरीर आसानी से बर्दाश्त कर सकता है। इसमें हमारी बेस्ट परफोरमेंस रहती है। इसके बाद अगर स्ट्रेस लेवल बढती है तो परफोर्मेंस कम होती जाती है। एक लेवल के बाद एंग्जायटी बढ़ने पर परफोर्मेंस जीरो हो जाती है।यहां समझने की बात ये है कि हर मनुष्य स्वभावतः जीरो स्ट्रेस लेवल में रहना चाहता है।

अगर आप स्ट्रेस लेवल थोड़ा बढ़ाएंगे तो परफोर्मेंस सुधरेगी व् परिणाम सकारात्मक आयेंगे। लेकिन अगर आप अचानक से स्ट्रेस लेवल ज्यादा बढ़ा देंगे तो परिणाम नकारात्मक आयेंगे। ज्यादातर लोगों के साथ यह होता है कि वो बहुत ऊँचे लक्ष्य बना कर एक साथ अपनी सारी ताकत झोक देते हैं पर इतना स्ट्रेस झेल नहीं पते हैं। फिर वो काम आधा ही छोड़ कर वापस कम्फर्ट जोन में आ जाते हैं। इसीलिए कम्फर्ट जोन तोड़ना बहुत मुश्किल होता है।

कैसे तोड़े कम्फर्ट जोन?


ऊपर के प्रयोग से स्पष्ट है कि अगर आपने जिंदगी को एक ख़ास तरीके से जीने की बहुत गंभीर आदत बना ली है तो इसका सीधा सादा अर्थ हुआ कि आप अपनी कम्फर्ट जोन में कैद हो गए हैं।अगर भाग्य ने करवट बदली और अचानक से आप को जिंदगी में कुछ नया कुछ बेहतर करने का अवसर मिला तो आप कर नहीं पायेंगे। आप का एंग्जायटी लेवल इतना बढ़ जाएगा कि आप स्ट्रेस बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे और वापस अपने कम्फर्ट जोन में आ जायेंगे।

ऐसे उदाहरण आपने देखे होंगे कि कई बार दूसरे शहर में नौकरी मिलने पर घर में पूरी तरह आराम से रहे बच्चे नौकरी छोड़ कर वापस आ जाते हैं, या मायके में नाजो पाली गयी लड़कियाँ ससुराल में काम का प्रेशर बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं। जीवन से अनुकूलन करने के लिए जरूरी
है आप अपनी कम्फर्ट जोन को एक्सटेंड करते रहें । कुछ तरीके हैं जिससे आप आसानी से अपनी कम्फर्ट जोन से बाहर आ सकते हैं। आइये देखते हैं इन्हें:


बढाएं छोटे –छोटे कदम:


जरूरत है बड़े काम को छोटे –छोटे टुकड़ों में बाँट कर धीरे –धीरे स्ट्रेस लेवल बढ़ाते हुए आगे बढ़ा जाए। इससे आप की कम्फर्ट जोन एक्सटेंड होती रहेगी। जैसे कि अगर आप को लोगो से बात करने में झिझक होती है तो पहली बार सिर्फ मिलने पर सिर्फ स्माइल के साथ हेलो कहे,अगली बार एक, दो लाइन की बात करे। कम्फर्ट जोन से बाहर आने के लिए जरूरी है आप अपने डर पहचाने और उन्हें दूर करने की दिशा में रोज़ एक –एक स्टेप बढ़ते जाए।

कभी-कभी चीजों को अलग ढंग से करें:

आप रोजाना के अपने कामों को अलग ढंग से करे। कई लोगो को अपनी तकिया की ही इतनी आदत हो जाती है कि उसके बिना उन्हें नींद नहीं आती है। इसलिए कभी–कभी दूसरे कमरे मे सोएं। अलग रास्ते से ऑफिस जाएं। उस दुकान से खरीदारी करिए जिससे आज तक नहीं की। एक हफ्ते कोई ख़ास चीज न खाने का प्रण कीजिये या कोई चीज अलग ढंग से बनाइये। धीरे–धीरे आप पाएंगे कि आप नयी परिस्तिथियों को अपनाने में ज्यादा दिक्कत महसूस नहीं करेंगे।

दो मिनट में निर्णय का नियम:


अगर आप परिस्तिथियों का बहुत देर तक आंकलन कर के निर्णय लेते हैं तो बहुधा आप निर्णय नहीं ले पाते। आपकी कम्फर्ट जोन आप को अनिर्णय की स्तिथि में छोड़ देती है और आप सफलता की दौड़ में पीछे रह जाते हैं। आज कौन सी सब्जी बनेगी… दो मिनट में सोचिये। दो शर्ट्स में से कौन सी ले दो मिनट में फैसला, कौन से नए रास्ते से जाए दो मिनट में निर्णय लीजिये। इससे आप 2 मिनट के अंदर सारी परिस्तिथि का आंकलन करेंगे और आपका दिमाग तेज –तेज चलेगा।

नयी–नयी जगहों का देखने जाइए:


पराया शहर,पराया देश पराये लोग जब आप किसी दूसरे शहर में घूमने जाते हैं तो आप को कई अनुकूलन करने पड़ते हैं जैसे मौसम से,आबोहवा से,खाने –पीने से। जब आप बार –बार दूसरे शहरों में जाते है तो आप की कम्फर्ट जोन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी होती है ऊपर से लौट कर आने पर आप ढेर सारे अनुभव ले कर आते हैं। यानी एक के साथ एक फ्री। है न मजेदार।

सीखिए कुछ नया:

दुनियाँ में इतना ज्ञान है, अगर रोज़ आप ऑफिस या घर के उन्ही –उन्ही कामों में सर खपाए रहेंगे तो कम्फर्ट जोन में कैद हो जायेंगे। कुछ नया सीखिए। नए विषयों की किताबें पढ़िए, नयी भाषा सीखिए, कार चलाना, फोटो ग्राफी कुछ भी पर हमेशा कुछ नया सीखते रहिये।फिर देखिये आपकी मोनोटोनस जिन्दगी का ट्रैक कैसे बदलता है।

तो क्या आप अपने कम्फर्ट जों की जंजीरें तोड़ने को तैयार हैं? क्या आप ग्रो करने और अपना पोटेंशियल रियलाइज़ करने के लिए रेडी हैं… तो क्यों न ये तोड़ – फोड़ आज ही से शुरू हो जाए!

धन्यवाद,

Thursday, 1 March 2018

कहीं आपकी डिग्री आपके सपने तो नहीं तोड़ रही ?

हेलो दोस्तों
           इस article का title आपको थोडा अटपटा लग सकता है . क्योंकि generally इंसान बड़ी-बड़ी डिग्रीयां लेकर तो बड़े बड़े सपने पूरे करता है , कोई MBBS की degree लेकर Doctor बनने का सपना तो कोई Engineering की degree लेकर Engineer बनने का सपना , और मैं इन्ही के द्वारा सपने टूटने की बात कर रहा हूँ!!
मेरा सवाल ये है कि आज आप जो हैं, क्या आपने ही वो बनने का सपना देखा था या आपको जबरदस्ती वो सपना दिखाया गया था ??
मैं एक middle class family से हूँ और बचपन से मेरे मित्र -यार भी ऐसे ही परिवारों से रहे हैं ; और ज्यादातर लोग जो इस blog को पढ़ते हैं वो भी ऐसे ही परिवारों से होते हैं ….शायद आप भी . ऐसे घरों में पढाई -लिखी को विशेष महत्त्व दिया जाता है , अक्सर parents यही expect करते हैं कि उनके बच्चे Engineer/ Doctor बने . और ये बात बच्चे के दिमाग में इतनी बैठा दी जाति है कि वही उसका सपना बन जाता है . इस process में कई बच्चे सचमुच उस सपने को अपना बना लेते हैं और इसी क्षेत्र में आगे चल कर बड़े बड़े काम करते हैं .पर समस्या वहां आती है जब आपके mature होने के साथ साथ आपके अपने सपने जन्म लेने लगते हैं …ऐसे सपने जिसका उस पढ़ाई लिखी से कोई सीधा वास्ता नहीं होता . For example: Computer Engineering कि पढ़ाई करके किसी अच्छी IT company में काम करने वाला बंदा अपना Restaurant खोलने का सपना देख सकता है , कोई MBA करके किसी multinational company में काम करने की बजाये किसी NGO में काम करने की सोच सकता है , कोई Doctor किसी हॉस्पिटल में operation करने की बजाये Artist बनने का dream देख सकता है.

पर अधिकतर लोग ऐसे कदम नहीं उठा पाते क्योंकि उनका उनकी degree उनके सामने आ जाती है , उनके मन में कुछ ऐसे विचार आ सकते हैं :
“ मैंने तो Engineering की है , इतनी अच्छी नौकरी कर रहा हूँ , अब इस field को छोड़ कर Restaurant खोलूँगा तो लोग क्या कहेंगे .”
“ अगर मैंने Artist बनने के बारे में किसी से बोला तो लोग मुझे पागल समझेंगे . .मेरी पढ़ाई में इतने पैसे लगे हैं …इतना वक़्त लगा है …it’s not possible to change my profession.”

और वो लोग खुद को समझा लेते हैं की जो होता है अच्छा होता है , मेरी किस्मत में यही करना लिखा था …etc.
ज्यादातर लोग परिस्थितियों से समझौता क्यों कर लेते हैं ?
क्योंकि ये करना आसान होता है …इसके लिए कोई risk नहीं उठाना पड़ता ,खुद को comfort zone से नहीं निकलना पड़ता …, इसके लिए हिम्मत नहीं चाहिए होती और साथ ही आप दुनिया की नजरो में एक normal इंसान बने रहते हैं .
अगर आप उन ज्यादातर लोगों में नहीं हैं तो बहुत अच्छी बात है ,आप अपने दिल की आवाज़ सुनकर सचमुच अपने और सोसाइटी के लिए अच्छा काम कर रहे हैं.और यदि आप उनमे से हैं जो अपने दिल की आवाज़ को दबा कर बैठे हों तो आपको सोचना होगा!!!!
सिर्फ अपने past decisions को सही ठहराने के लिए आप कब तक गलत future decisions लेते रहेंगे? जो डिग्री आपको आज़ाद करने की बजाये बांधे उसका भला क्या काम? और ऐसा भी नहीं है कि आप जो नया काम करने की सोच रहे हैं वहां आपका पिछला ज्ञान बिलकुल ही काम ना आये. वो भले आप directly ना use कर पाएं, पर किसी भी उच्च शिक्षा को हासिल करने में आपके brain का जो development होता है और आपका जो outlook broad होता है वो हर एक काम में आपकी मदद करेगा.
अपने चेहरे पर किसी और का मुखौटा लगा कर ज़िंदा तो रहा जा सकता है पर जिया नहीं जा सकता, एक fulfilling life जीने के लिए आपको अपने मन का काम चुनना होगा., कुछ ऐसे ही जैसा Harsha Bhogle ने , IIM Ahmedabad से MBA करने के बाद कुछ साल corporate world में काम तो किया पर खुद को अपने दिल की आवाज़ सुनने से नहीं रोक पाए और एक जाने-माने cricket commentator बन गए. Chetan Bhagat भी IIT और IIM से पढ़ाई करने के बाद एक author हैं. Samir Soni , University of California, Los Angeles से Economics. की पढाई करने के बाद as an Investment Banker काम करते थे पर आज वो acting की दुनिया में नयी ऊँचाइयाँ छू रहे हैं.
और आपको 3 Idiots का Farhaan (Madhavan ) तो याद होगा ही . उसने अपने पिता की इच्छा पूरी करते हुए Engineering तो कर ली पर Rancho की motivation ने finally उसे अपने दिल का काम करने की हिम्मत दे डाली और वो एक renowned wild life photographer बन गया.
इस movie की तरह असल ज़िन्दगी में भी आपके parents तभी सबसे ज्यादा खुश होते हैं जब आप खुद सबसे ज्यादा खुश होते हैं. और आप तभी सचमुच खुश और संतुष्ट हो सकते हैं जब आप अपने दिल की सुने.
दोस्तों जब आप सचमुच किसी चीज को पूरी शक्ति से चाहते हैं तो Law of Attraction अपना काम करने लगता है,भले शुरू में कोई आपका साथ ना दे पर यदि आप determined हैं तो धीरे-धीरे लोग आपको support करने लगते हैं और आपके सामने ऐसी opportunities आने लगती हैं जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होता.
सपने देखना और उन्हें साकार करना सिर्फ आपको inner satisfaction ही नहीं देता बल्कि long term में financially भी ये कहीं अच्छा निर्णय साबित होता है. मैंने जो भी examples ऊपर लिए हैं , ये सभी लोग शायद नौकरी करके इतने पैसे नहीं कम पाते जितना वो अपने दिल का काम करते हुए कमा पा रहे हैं.
यदि आप भी किसी trap में फंसे हैं और अपनी degree का बोझ ढो रहे हैं तो उस बोझ को उतार फेंकिये,दोस्तों , Steve Jobs की कही ये बातें याद रखिये:
” आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत कीजिये. बेकार की सोच में मत फंसिए,अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से मत चलाइए. औरों के विचारों के शोर में अपनी अंदर की आवाज़ को, अपने intuition को मत डूबने दीजिए.
आपका काम आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होगा, और truly-satisfied होने का एक ही तरीका है की आप वो करें जिसे आप सच-मुच एक बड़ा काम समझते हों. और बड़ा काम करने का एक ही तरीका है की आप वो करें जो करना आप enjoy करते हों. “
उम्मीद है ये बातें मेरी तरह आपको भी अपना दिल की सुनने की प्रेरणा देंगी.
All the best! May all your dreams come true .

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